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Sunday, September 18, 2016

ड़ूब मरे सरकार, मोमबत्ती की रोशनी से बची रहीं 17 नवजातों की जान

ड़ूब मरे सरकार, मोमबत्ती की रोशनी से बची रहीं 17 नवजातों की जान


पानीपत 18 सितंबर (स्टार हरियाणा, गजेंद्र राजपूत ) | म्हारा गांव , जग मग गांव का नारा देने वाली हरियाणा सरकार का सच बीती रात के अँधेरे में उस वक़्त उजला हुआ जब उन्हीं के  अस्पताल में 17 नवजातों की जिंदगी मोमबत्ती की रौशनी पर टिकी रही, जिससे अंदाज लगाया जा सकता है की जो सरकार शहर के सरकारी अस्पतालों में बिजली की व्यवस्था नहीं कर सकती तो गांव में कैसे 24 घंटे बिजली दे सकती है । दरअसल मामला कुछ इस कदर है, पानीपत के सिविल अस्पताल की प्रथम मंजिल पर शनिवार शाम करीब 7 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जिससे अस्पताल की बिजली गुल हो गई। रात 12:15 बजे लाइट आई। इस दौरान मरीज तड़पते रहे। बिजली जाने से स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट की सारी मशीनें (वार्मर, मॉनीटर आदि) बंद हो गईं। जिन नवजात बच्चों की जिंदगी इन मशीनों पर टिकी थी, उन्हें भगवान भरोसे गलियारे में लिटा दिया गया।
5 घंटे तक अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार मौके पर नहीं आया और ही बिजली दुरुस्त के लिए कोई इंतजाम किए गए। सिविल अस्पताल की खोखली व्यवस्थाओं पर सीएमओ से देर रात बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

मची ऑफरा तफरी  :शॉर्टसर्किट से आग लगने से सिविल अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल हाे गया। हालांकि कुछ ही मिनटों में अग्नि शमन यंत्रों से आग पर काबू पा लिया गया, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।

जब बच्चों को सांसे देने वाली मशीनें हुई बंद : स्पेशलन्यूबोर्न केयर यूनिट में 17 नवजात भर्ती थे। नवजात को यूनिट से बाहर भेज दिया गया। तीन बच्चे लावारिस मिले थे, वे ही यूनिट में रहे। मशीनें बंद होने से हार्ट बीट, ऑक्सीजन की मात्रा, पल्स आदि की जानकारी नहीं मिली।

मोमबत्ती का कमाल  :बिजलीगुल हो जाने के बाद मरीजों के इलाज करने में भी परेशानी हुई। नर्सिंग स्टाफ को मोबाइल टॉर्च और मोमबत्ती जलाकर लोगों को दवा आैर इंजेक्शन देना पड़ा। डिलीवरी वार्ड में अंधियारा था। गर्भवती महिलाओं को खासी परेशानी हुई।